Types of Company in India

 कंपनी की परिभाषा और अर्थ

दोस्तों किसी भी कंपनी या व्यवसाय को पंजीकृत करने से पहले हमें इस बात को देखना पड़ता है कि वह कंपनी किस प्रकार की है तो यदि आप भी किसी कंपनी या व्यवसाय को पंजीकृत करने के बारे में सोच रहे है तो यह ब्लॉग आपके काम का हो सकता है क्योंकि इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि कंपनियां कितने प्रकार की होती हैं एवं किस प्रकार की कंपनी को किस रूप में पंजीकृत किया जा सकता है। आप मुझे मेरे youtube https://youtu.be/b-ZWX1nQ80I channel  पर भी सब्सक्राइब कर सकते है
तो चलिए शुरू करते हैं, साथ ही यदि आप पूरी जानकारी चाहते हैं तो इस ब्लॉग को अंत तक पढ़ना बिल्कुल ना भूलें ।

contents 

1. निगमन  के आधार पर बनी कंपनी
2. सदस्यों  के आधार पर बनी कंपनी
3. दायित्व के आधार पर बनी कंपनी
4. नियंत्रण या होल्डिंग के आधार पर बनी कंपनी
5. अन्य कंपनी तरह की कंपनी

कंपनी के प्रकार

विभिन्न सोर्स से जुटाई गई जानकारी के अनुसार, कंपनियों के बहुत से प्रकार होते हैं।
इसलिए कंपनियां कितने प्रकार की होती हैं यह जानने के लिए हम इन्हें अलग-अलग आधार पर वर्गीकृत कर सकते हैं मुख्यत: कंपनियों को हम सदस्यों की देनदारी (Liability), सदस्यों की संख्या, कंपनी के रजिस्ट्रेशन की जगह, कंपनी पर नियंत्रण तथा अन्य कई आधार पर वर्गीकृत कर सकते हैं। जो निम्न है । आईपीओ के बारे में जानने के लिए क्लिक करे https://tarunblogs.com/1298-2-ipo-kya-hai/

A). Types of companies listed on the mode of incorporation

निगमन के आधार पर कंपनियों के प्रकार

इस आधार पर कंपनियों को 3 तरह से वर्गीकृत किया जा सकता है
1. विशेष अधिनियम के आधार पर बनी कंपनियां – रॉयल चार्टर्ड कंपनियां
2. किसी विशेष आदेश के द्वारा बनाई गई कंपनियां – वैधानिक कंपनियां
3. सामान्य कंपनी की तरह पंजीकृत कंपनियां – पंजीकृत या निगमित कंपनियां

1. रॉयल चार्टर्ड कंपनियां – Royal Chartered Company

रॉयल चार्टर्ड कंपनियां रॉयल चार्टर द्वारा बनाई गई कंपनियां है इसका मतलब है कि इन्हें किसी राजा या रानी के विशेष आदेश से अधिकार दिया गया है या बनाया गया है। रॉयल चार्टर्ड कंपनियों के मुख्य उदाहरण हैं जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी, बीबीसी, बैंक ऑफ इंग्लैंड आदि

2. वैधानिक कंपनियां – Statutory Company

वैधानिक कंपनियां केंद्र या राज्य के विधान मंडल द्वारा पारित एक विशेष अधिनियम के द्वारा निर्मित कंपनियां होती हैं इन कंपनियों में अनिवार्य शक्तियों के साथ निवेश किए जाते हैं |

यह मुख्य रूप से राष्ट्रीय महत्व के व्यवसाय करने के लिए जिम्मेदार होती हैं वैधानिक कंपनियों के कुछ उदाहरण इस प्रकार है जैसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI अधिनियम, 1934 के तहत), भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC अधिनियम, 1956 के तहत)

3. पंजीकृत या निगमित कंपनियां – Registered or Incorporated Company

सरकार द्वारा पारित कंपनी अधिनियम के तहत बनी अन्य सभी प्रकार की कंपनियां पंजीकृत या निर्मित कंपनियां कहलाती हैं।
यह कंपनियां खुद को अधिनियम के तहत पंजीकृत करने के बाद ही अस्तित्व में आती हैं और इनके निगमन का प्रमाण पत्र कंपनियों के रजिस्ट्रार द्वारा पारित किया जाता है इस कंपनी कि एक अच्छी उदाहरण है- गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी।

 

Type of Companies – classification & kinds
B). Types of companies based on the number of members
सदस्यों की संख्या के आधार पर कंपनियों के प्रकार : सदस्यों की संख्या के आधार पर कंपनियों को मुख्यतः तीन श्रेणियों में बांट सकते हैं

1. सार्वजनिक कंपनी – public limited company

 लिमिटेड कंपनी का मतलब  एक ऐसी कंपनी है जिसकी प्रदत्त पूंजी 5 लाख रुपए या उससे ज्यादा होती है। पब्लिक लिमिटेड कंपनी का कानूनी रूप से अस्तित्व उसके शेयर होल्डर्स पर निर्भर नहीं करता है साथ ही इसके सदस्यों की देयता भी सीमित होती है।
इस तरह की कंपनी बनाने के लिए न्यूनतम 7 शेयर होल्डर्स और न्यूनतम 3 डायरेक्टर का होना जरूरी है परंतु इस तरह की कंपनी में कितने शेयरहोल्डर्स हो सकते हैं इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
इस तरह की कंपनी में कंपनी को अपने शेयर्स को बेचने के लिए पब्लिक को आमंत्रण देना पड़ता है और वह शेयरों की बिक्री से पूंजी इकट्ठी करती है, साथ ही उनके शेयर होल्डर्स को शेयर्स का ट्रांसफर करने की भी परमिशन देती है।
परंतु शेयर होल्डर्स को कंपनी के रोज के प्रबंधन में भाग लेने का अधिकार नहीं है। इस प्रकार इस तरह की कंपनी में प्रबंधन ( Management) और स्वामित्व (Ownership) अलग अलग लोगों का होता है। कंपनी के मुख्य निर्णय निदेशक मंडल (Board of Directors) के द्वारा लिए जाते हैं।

2. निजी कंपनी – Private limited company

यह कंपनी का सबसे लोकप्रिय प्रकार है। इस प्रकार की कंपनी की प्रदत्त पूंजी 1 लाख रुपए या इससे ज्यादा होती है। इस तरह की कंपनी में मिनिमम 2 और अधिकतम 15 डायरेक्टर हो सकते हैं। और यदि शेयरहोल्डर्स की बात करें तो मिनिमम 2 और अधिकतम 200 शेयर होल्डर्स हो सकते हैं साथ ही इनकी देयता कंपनी के प्रकार पर निर्भर करती है।
इसके अनुसार इनकी देयता सीमित या असीमित कुछ भी हो सकती है। इस कंपनी में हम पब्लिक लिमिटेड कंपनी की तरह शेयर का ट्रांसफर, पब्लिक के साथ नहीं कर सकते हैं। यहां पर शेयरों का हस्तांतरण केवल इस कंपनी के सदस्यों तक ही सीमित रहता है।
प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ऐसे बहुत सारे रूल्स और रेगुलेशन से मुक्त रहती है जो पब्लिक लिमिटेड कंपनियों पर लागू होते हैं।
प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को शुरू करने के लिए सिर्फ सर्टिफिकेट आफ इनकॉरपोरेशन की आवश्यकता होती है जबकि पब्लिक लिमिटेड कंपनी को शुरू करने के लिए कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (Certificate of Commencement) की भी आवश्यकता भी होती है, साथ ही प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को अपने नाम के साथ Private Limited शब्द लगाना अनिवार्य होता है।

3. वन पर्सन कंपनी – One Person Company

वन पर्सन कंपनी अर्थात OPC को भारत में कंपनी के एक नए प्रकार के रूप में वर्ष 2013 के कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पेश किया गया था। जैसा की नाम से ही स्पष्ट होता है इस कंपनी में एकल स्वामित्व होता है।
परंतु फिर भी मालिक की देयता सीमित होती है, जो उसकी व्यक्तिगत संपत्ति से अलग होती है। इस प्रकार यदि कभी घाटे की वसूली की जरूरत पड़ती है या कभी कंपनी का परिसमापन (Liquidation) किया जाता है तो वह आसानी से पूरा किया जा सके। इसे Proprietorship भी कहते है। इस तरह की कंपनियों में किसी न्यूनतम शेयर पूंजी का होना जरूरी नहीं है। one person company क्या है और इसकी ज्यादा जानकारी के लिए क्लिक करे https://tarunblogs.com/one-person-company/

C). Types of Company on the basis of Liabilities

सदस्यों की देनदारी के आधार पर कंपनियों के प्रकार: दोस्तों, घाटा होने के मामले में, किसी कंपनी के सदस्य उसे अपनी व्यक्तिगत संपत्ति से भुगतान करके पूरा करेंगे या अपने द्वारा रखे गए शेयरों के अंकित मूल्य की सीमा तक भुगतान करके पूरा करेंगे यह सब केवल इस बात पर निर्भर करता है कि वह कंपनी किस तरह से पंजीकृत है।
सदस्यों के दायित्व के आधार पर कंपनियों को तीन तरह से वर्गीकृत करते हैं

1. शेयर के आधार पर लिमिटेड कंपनी – Company Limited by Shares

कभी-कभी कंपनी के शेयरहोल्डर्स एक बार में शेयरों की पूरी कीमत अदा नहीं करते है। इस तरह की कंपनी में शेयरधारकों की देयता उनके द्वारा रखे गए शेयरों के अंकित मूल्य की सीमा तक सीमित रहती है |
दूसरे शब्दों में कहें कि घाटे के मामले में सदस्य केवल तब तक उत्तरदायी माने जाएंगे, जब तक वह अपने शेयर्स की बची हुई राशि का भुगतान नहीं करते हैं। ज्यादातर प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां इसी तरह की होती है।

2. गारंटी द्वारा लिमिटेड कंपनी – Company limited by Guarantee

इन कंपनियों के एसोसिएशन के ज्ञापन में धन की उस मात्रा का उल्लेख रहता है जो इसके सदस्य अदा करने की गारंटी देते हैं अर्थात परिसमापन (Liquidation) या घाटे के मामले में शेयरधारक कंपनी के लॉस को कवर करने के लिए उस निश्चित राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होते हैं।

3. असीमित कंपनियां – Unlimited Companies

इस तरह की कंपनी में शेयरधारकों की देयता की कोई सीमा नहीं होती है। इसलिए परिसमापन (Liquidation) के मामले में या घाटा होने पर कंपनी अपनी देनदारियों को कवर करने के लिए शेयरधारकों की व्यक्तिगत संपत्तियों का प्रयोग कर सकती है|
इस तरह की कंपनी के सदस्यों की देनदारियां कंपनी के पूरे कर्ज के चुकता होने तक रहती है। इन्हीं सभी कारणों से आज इस प्रकार की कंपनी नहीं होती है।
D). Types of the company on the basis of control or holding
नियंत्रण या होल्डिंग के आधार पर कंपनियों के प्रकार : इस आधार पर कंपनियां दो तरह की होती है

1. होल्डिंग और सहायक कंपनियां – Holding and Subsidiary company

कभी कभी किसी कंपनी के शेयर पूरी तरह से या आंशिक रूप से किसी अन्य कंपनी के द्वारा होल्ड किए जाते हैं इसलिए जो कंपनी इन शेयर्स को रखती है वह इन शेयर्स की मालिक बन जाती है अर्थात होल्डिंग या मूल कंपनी कहलाती है और जिस कंपनी के शेयर्स को मूल कंपनी रखती हैं वह कंपनी उसकी सहायक कंपनी बन जाती है।

2. एसोसिएट कंपनियां – Associate Companies –

एसोसिएट कंपनियां, वे कंपनियां होती हैं जिनमें दूसरी कंपनियों का महत्वपूर्ण प्रभाव होता है यह महत्वपूर्ण प्रभाव किसी दूसरी सहायक कंपनी के लगभग 20% शेयर्स के स्वामित्व बराबर हो सकता है। एसोसिएट कंपनी का उसकी सहायक कंपनी पर नियंत्रण एक एग्रीमेंट के तहत होता है।
E). Other Types of companies
अन्य तरह की कंपनियां :

1. सरकारी कंपनियां – Government Company

सरकारी कंपनियां वे कंपनियां होती हैं जिनकी 50% से अधिक पूंजी या तो केंद्र सरकार की होती है अथवा एक या एक से अधिक राज्य सरकार की अथवा संयुक्त रूप से केंद्र और एक या एक से अधिक राज्य सरकार की होती है।

2. विदेशी कंपनियां – Foreign Company

विदेशी कंपनियां भारत के बाहर इनकॉरपोरेटेड होती है। ये भारत में व्यापार करने के लिए थोड़े से स्थान का प्रयोग करके या किसी अन्य कंपनी के साथ मिलकर भी व्यापार करती हैं।

3. धर्मार्थ कंपनियां – Charitable Company

इस तरह की कंपनियों को धारा 8 कंपनियां भी कहते हैं क्योंकि ये कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत होती है। इन कंपनियों के अपने धर्मार्थ उद्देश्य होते हैं।
इन कंपनियों के मुख्य धर्मार्थ उद्देश्यों में कला, विज्ञान, संस्कृति, शिक्षा, धर्म, व्यापार, खेल आदि को बढ़ावा देने के उद्देश्य होते है।

4. निष्क्रिय कंपनियां – Dormant Company

यह कंपनियां मुख्य तौर पर भविष्य की परियोजनाओं के लिए बनाई जाती हैं। इनके पास कोई भी महत्वपूर्ण लेन देन आदि नहीं होते हैं और यह नियमित कंपनियों के सभी अनुपालनों को पूरा भी नहीं करती हैं।

5. निधि कंपनियां – Nidhi Company

निधि कंपनी अपने सदस्यों के बीच बचत और बचत की आदतों को बढ़ावा देने के लिए काम करती है यह अपने सदस्यों से जमा प्राप्त करती हैं और उसे अपने लाभ के लिए प्रयोग करती हैं।

6. सार्वजनिक वित्तीय संस्थान – Public Financial Institutions

भारतीय जीवन बीमा निगम, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया ऐसी बहुत सारी कंपनियां हैं जिन्हें सार्वजनिक वित्तीय संस्थान माना जाता है यह कंपनियां अनिवार्य रूप से सरकारी कंपनियां ही होती हैं जो सार्वजनिक वित्त पोषण का कार्य करती हैं।

निष्कर्ष  – 

आप जब कभी भी  अपनी कंपनी की शुरुआत करे तो कंपनी की type को जरुर समझ ले , क्यूंकि आपको इन बातो का पता होना चाहिए की आपको टैक्स कितनी सेल पर कितना लगेगा , आप अगर लिमिटेड या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खोलना चाहते है तो आपको उसके दायित्व के बारे में पता जरुर होना  चाहिए |
आप ऊपर सब बातो को ध्यान में रख कर ही कंपनी खोले |
 दोस्तों उपर्युक्त आर्टिकल को पढ़कर यह जानकारी मिल गई होगी कि कंपनियां कितने प्रकार की होती है। अगर आपको आर्टिकल अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना बिलकुल न भूलें।

यदि आप शेयर मार्केट सच मे सीखना चाहते है तो इस eBook को आप जरूर पढ़े https://imojo.in/YbHR8

आप मुझे youtube पर भी फॉलो कर सकते है मेरे चैनल का नाम है Investing With Tarun .
यदि आप मुझसे इन्वेस्टमेंट से जुडा कोई सवाल पूछना चाहते है तो आप मेरी वेबसाइट https://www.tarunblogs.com
पर अवश्य जाये |

4 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here